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Shattila Ekadashi Vrat Katha, Vidhi in Hindi
Shattila Ekadashi Vrat Katha, Vidhi in Hindi

षटतिला एकादशी व्रत कथा – Shattila Ekadashi Vrat Katha, Vidhi in Hindi

षट्तिला एकादशी व्रत – Shattila Ekadashi Vrat in Hindi
(माघ कृष्ण – एकादशी)

इस दिन काली गाय तथा काले तिलों को दान का माहात्म्य है । शरीर पर तिल तेल, गर्दन, तिल-जल स्नान, तिल-जल-पान तथा तिल पकवान इस व्रत के विशिष्ट उपादान है । इस दिन तिलों का हवन करके श्री कृष्ण ने नारद जी को बताया था ।

षटतिला एकादशी व्रत कथा – Shattila Ekadashi Vrat Katha in Hindi

एक ब्राह्मणी थी । उसने तपस्या करके अपना शरीर सुखा डाला । उसके तप से प्रसन्न होकर प्रभु भिखारी के रूप में उसके द्वार पर भीख माँगने गये । ब्राह्मणी ने आक्रोश में आकर उनके भिक्षा पात्र में मिट्टी का ढेला डाल दिया। मरणोपरांत, बैकुण्ड में उसे रहने के लिए मिट्टी का स्वच्छ एवं आलीशान मकान दिया गया । उसके लिए खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी । यह सब देखकर उसे दुःख हुआ। उसने सोचा मैनें इतना कठोर तप भी किया पर फिर भी मुझे यहाँ खाने-पीने के लिए कुछ भी क्यों उपलब्ध नहीं है ।

उसने प्रभु से इसका कारण पूछा । प्रभु ने कहा – ” इसका कारण देवांगन से पूछो। “देवांगनाओ ने उसे बताया – “तुमने षट्तिला एकादशी का व्रत नहीं किया हैं । “ब्राह्मणी ने पुन: षट्तिला का व्रत किया और स्वर्ग के सारे सुखों का उपभोग किया ।

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