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(Padmini) Kamala Ekadashi Vrat katha in Hindi
कमला (पद्मिनी) एकादशी व्रत कथा - (Padmini) Kamala Ekadashi Vrat katha in Hindi

कमला (पद्मिनी) एकादशी व्रत कथा – (Padmini) Kamala Ekadashi Vrat katha in Hindi

कमला एकादशी व्रत कथा – Kamala Ekadashi Vrat katha in Hindi

कमला एकादशी व्रत कथा जिसे हम पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi Vrat katha in Hindi) भी कहते है।

(अधिक मास शुक्ल एकादशी)

अधिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को “पद्मिनी एकादशी” या “कमला एकादशी” भी कहते है। यह एकादशी प्रत्येक वर्ष न आने के कारण विशेष महत्व रखती है। इस एकादशी के दिन राधाकृष्ण और शिवपार्वती का पूजन करने का विधिविधान है। इस व्रत में दान का विशिष्ट महत्व है। इस दिन कांसे के पात्र में भोजनमसूर की दालचना, कांदी, शहदशाक, पराया अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। इस दिन नमक का प्रयोग भी न करें तथा कंदमूल फलादि का भोजन करें। एकादशी के दिन प्रात: उठकर नित्य क्रिया से निवृत होकर उसे दातुन करना चाहिए और बारह बार कुल्ला करना चाहिए स्नान करने के लिये मिट्टीतिलकुश और आंवले का प्रयोग करना चाहिए। स्नान करते समय प्रथम बार शरीर में मिट्टी लगाते समय प्रार्थना करनी चाहिए- हे मूतिका तुम मुझे अपनी तरह शुद्ध बना दो, जिससे मैं भगवान की पूजा करने के योग्य हो जाऊं। स्नान करने के पश्चात स्वच्छ और सुन्दर वस्त्र धारण करने चाहिए और संध्या में तर्पण करके मंदिर में जाकर भगवान की पूजा करनी चाहिए

(अधिक मास शुक्ल एकादशी)

श्री कृष्ण कहते हैं – प्राचीन काल में महिष्मती नगरी में कृतवीर्य नामक राजा राज्य करता था। उसकी अनेक रानियां थीं। परंतु किसी भी रानी से राजा को संतान की प्राप्ति नहीं हुई। उसने अनेक व्रत उपवास और यज्ञ किए पर कोई लाभ न हुआ। इससे दुखी हो राजा वन में जाकर तपस्या करने लगा। उनकी रानी प्रमदा वस्त्रालंकारो को त्याग कर अपने पति के साथ गंधमादन पर्वत चली गयी।

दस हज़ार वर्ष तप करते हुए बीत गएपरन्तु भगवान प्रसन्न न हुए तब एक दिन उसकी एक रानी प्रमदा ने अत्रि की पनी महासती अनुसूयाज़ी की सेवा कर उनसे पुत्र प्राप्ति का उपाय पूछा। उन्होंने उसे पद्मिनी एकादशी का विधान से व्रत करने को कहा जिसे करने से भगवान राजा के सामने प्रकट हुए और ।उसे प्रसन्न होकर वरदान दिया-तेरे सर्वश्रेष्ठसर्व विजयी देव दानवादि से अजयसहत्र भुजा वाला पुत्र उत्पन्न होगा। इस व्रत के प्रभाव से उनके घर में एक प्रतापी पुत्र हुआ। जिसने तीनों लोकों के विजेता रावण को हराकर बंदी बना लिया तथा उसे बाँधकर अपने घुड़साल के स्थान पर रखा और घर में रावण के दस मस्तकों पर दस दीपक जलाकर उसे खड़ा रखा।

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